वाह रे हमारी पुलिस – चाेर काे ताे पकड़ा नहीं, उल्टा मंदिर प्रबंधक काे ही ठहरा रहे दाेषी

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वाह रे हमारी पुलिस – चाेर काे ताे पकड़ा नहीं, उल्टा मंदिर प्रबंधक काे ही ठहरा रहे दाेषी

मीडिया में खबर देना गलत – कहा इससे हाेती है आपकी बदनामी

न दिया कंप्लेंट नंबर – न ही दर्ज की एफआईआर

(HNI ब्यूराे) – हमारी पुलिस कब क्या करे यह काेई नहीं जानता। पुलिस के कुछ कर्मचारी अपनी कार्गुजारी से पूरे प्रशासन की साख काे गहरा धक्का लगाने का काम कर देते हैं। ऐसा ही कुछ उस समय सामने आया, जब ग्रीन माडल टाऊन स्थित विनय मंदिर में पिछले महीने दाे बार हुई चाेरी की घटना के बाद इसकी खबर मीडिया में प्रमुखता से आने पर थाना नं 6 के कुछ पुलिस वालाें काे बुरा लग गया।

थाना नं 6 की तरफ से इतने दिन बीत जाने के बाद भी चाेर ताे पकड़ा नहीं गया, उल्टा मंदिर प्रबंधक काे ही चाेरी के लिए दाेषी ठहराने का काम किया जा रहा है।

इतना ही नहीं बार-बार पूछने के बावजूद आज तक पुलिस द्वारा मंदिर प्रबंधन काे न ताे कंप्लेट का काेई नंबर ही दिया गया है – न ही आज तक इस मामले में एफआईआर दर्ज करके उन्हें सूचित किया गया है। बल्कि पुलिस वाले मंदिर वालाें काे यह कह रहे हैं, कि मीडिया में खबर देकर उन्हाेंने गल्त किया है, इससे उनकी व मंदिर की बदनामी ही हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार खबरें प्रकाशित हाेते ही इनकी नींद खुली अैार यह आननफानन में मंदिर पहुंच गए। मंदिर जाकर एक बार फिर से बयान दर्ज करने की अैापचारिकता पूरी की व साथ ही यह भी कहने लगे, कि आपके मंदिर में हुई चाेरी के लिए पुजारी एवं प्रबंधक ज़िम्मेदार हैं।

क्याेंकि किसी अनजान व्यक्ति काे आपने अंदर कैसे आने दिया ? इतना ही नहीं आपने बिजली रिपेयर के लिए अपने पक्के मकैनिक क्याें नहीं रखे हैं ? मंदिर के सीसीटीवी काे आपने अपने माेबाईल से कनैक्ट किया है या नहीं ? अगर किया है ताे फिर चाेरी वाले दिन आपने अपना माेबाईल क्याें नहीं चैक किया, ताकि चाेरी के समय आपकाे पता लग जाता ?

जब मंदिर के प्रबंधकाें ने उक्त पुलिस कर्मचारी काे कहा, कि यह ताे सार्वजनिक जगह है, यहां किसी काे आने से कैसे राेका जा सकता है ? ताे वह काेई जवाब नहीं दे सका।

जहां तक चाेर का सवाल है, उसने खुद काे बिजली मकैनिक बताया, जिससे मामूली रिपेयर के लिए पुजारी ने 1-2 बार बुला लिया। उन्हें इस बात का पता नहीं था कि वह असल में एक चाेर है। सीसीटीवी माेबाईल के साथ कनैक्ट करने की बात पर प्रबंधकाें ने पुलिस वालाें काे बताया कि उनके माेबाईल कनैक्ट हैं, मगर सुबह 6 बजे उन्हें कैसे पता रहता, कि इस समय माेबाईल देखना है, क्याेंकि मंदिर में चाेरी हाेने वाली है।

पुलिस कर्मचारियाें का एसा रवैय्या बेहद हैरान करने वाला एवं हास्यपद है। क्याेंकि आम जनता के मन में यह साेचकर सुरक्षा की भावना आती है कि पुलिस के रहते उन्हें इंसाफ मिलेगा व अगर काेई व्यक्ति गल्त काम करता है, ताे पुलिस उसे पकड़कर बनती सज़ा देगी। मगर यह काेई नहीं साेचता कि अगर चाेरी जैसी काेई घटना हाेती है, ताे हमारी पुलिस आम जनता काे ही कटघरे में खड़े करने का काम शुरू कर देगी।

पुलिस का काम है अपराधियाें का पता लगाना व उनके ऊपर नकेल कसना – ना कि आम जनता काे यह पाठ पढ़ाना कि वह मीडिया में जाएंगे ताे उनकी बदनामी हाे जाएगी या फिर उन्हीं काे बिना वजह कसूरवार ठहराना। अगर पुलिस के ऐसे कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाएंगे ताे आन जनता का कानून-व्यवस्था पर विश्वास उठ सकता है।

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