स्वामी अग्निवेश- बंधुआ मजदूरी के खिलाफ लड़ाई के हीरो और हिंदूफोबिक

Swami Agnivesh (2019)

स्वामी अग्निवेश- बंधुआ मजदूरी के खिलाफ लड़ाई के हीरो और हिंदूफोबिक

रवि रौणखर, जालंधर

समाज सेवी स्वामी अग्निवेश नहीं रहे। वर्ल्ड काउंसिल ऑफ आर्य समाज के वह 10 साल तक प्रधान रहे। उन्हें लिवर की बीमारी थी। वह मंगलवार से वेंटिलेटर पर थे। डॉक्टरों के मुताबिक उनके ज्यादातर अंग काम करना बंद कर गए थे। 81 साल की उम्र में शुक्रवार शाम उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली।

स्वामी अग्निवेश जबतक बंधुआ मजदूरों के लिए काम करते रहे तब तक देश ने उन्हें सर आंखों पर बिठाया। जैसे ही उन्होंने हिंदू देवी देवताओं, परंपराओं और धार्मिक स्थलों पर कटाक्ष और विवादास्पद टिप्पणियां करनी शुरू कीं, तभी देश की जनता के दिल से एक प्रगतिशील योगी एक विवादास्पद स्वामी बन गया। वह लोगों के दिलों से उतर गए।

अग्निवेश धीरे धीरे विवादों में धंसते गए। जगन्नाथपुरी, श्री अमरनाथ स्थित बर्फ से बने शिवलिंग, श्री राम और बार बार हिंदू देव देवताओं पर भद्दी और विवादास्पद टिप्पणियों ने उन्हें भारतीय जनमानस में एक विलेन की तरह स्थापित कर दिया।

स्वामी अग्निवेश जब आर्य समाज में दाखिल हुए तो देश की सबसे ताकतवर सांस्कृतिक संस्था भी बिखरनी शुरू हो गई। वह धीरे धीरे अपने मूल कार्य और मिशन से भटक गए। उन्हें एक बुद्धिजीवी और बंधुआ, बालमजदूरी से हिंदूफोबिक बनने में ज्यादा समय नहीं लगा।

2018 में झारखंड में उन्होंने सनातन धर्म पर भद्दी टिप्पणी की। यहां उन्हें मारपीट सहनी पड़ी। जानकार बताते हैं कि विचारों पर कोई पहरा नहीं होना चाहिए लेकिन स्वामी अग्नीवेश के विचार सिर्फ एक धर्म विशेष के खिलाफ ही क्यों होते हैं इस सवाल का जवाब स्वामी जीते जी नहीं दे पाए। उन्होंने बाकी धर्म, पंथ, संप्रदाय के खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा मगर सनातन धर्म पर हमेशा हमलावर रहे।

70 के दशक में उन्होंने चुनाव लड़ा और वह हरियाणा के शिक्षा मंत्री भी रहे।  स्वामी अग्निवेश को हमेशा बंधुआ मजदूरों की आजादी और हिंदू धर्म पर अनावश्यक टिप्पणियों के लिए जाना जाएगा।

1 Comment

  • Kris
    September 20, 2020

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