आयुष्मान घोटाला – आरोगया मित्रा की भर्ती करने वाली कंपनी M.D इंडिया पर भी लगे सवालिया निशान ?

आयुष्मान घोटाला – आरोगया मित्रा की भर्ती करने वाली कंपनी M.D इंडिया पर भी लगे सवालिया निशान ?

फिक्स रेट से कम सैलरी देेने के लगे गंभीर आरोप
– DMC  नवांशहर ने पड़ताल रिपोर्ट में डीसी रेट न देने, EPF व ESI ने देने का पाया दोषी
– सिविल सर्जन नवांशहर ने डायरैक्टर सेहत व परिवार भलाई विभाग को कारवाई के लिए की सिफारिश

(एचएनआई ब्यूरो)

जरूरतमंद व गरीब लोगों को मुफ्त इलाज की सुवधिा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शुरू की गई अतिमहत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत को कुछ लालची किस्म के लोगों की वजह से ग्रहण लगने लगा है। HOT NEWS INDIA की तरफ से शुरू की गई। आयुष्मान घोटाला सीरीज को लोगों ने काफी सराहा और केवल पैसों के लालच में सरकार के इस बेमिसाल प्रयास को असफल बनाने में लगे कुछ डाक्टरों व अस्पतालों के खिलाफ विजीलैंस विभाग की तरफ से बाकायदा तौर पर जांच भी आरंभ की जा चुका है। इसी मामले में एक नया मामला सामने आया है जिसमें इस योजना को आम जनता तक सही ढंग से पहुंचाने के लिए रखे गए आरोगया मित्रों की भर्ती करने वाली निजी कंपनी एम.डी. इंडिया पर भी कई सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। बड़े स्तर पर हो रही इस घपलेबाकाी को लेकर सिविल सर्जन नवांशहर ने डायरैक्टर सेहत व परिवार भलाई विभाग द्वारा बनती कारवाई के लिए भी लिखा गया है, मगर आज तक न तो कंपनी और न ही दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कोई कारवाई की गई है। जिससे सेहत विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ जाती है।

क्या है मामला, क्यों की गई कंपनी के खिलाफ कारवाई की सिफारिश ?

आयोगया मित्रा यूनियन की तरफ से पीबीग्राम पोर्टल के ऊपर 4 शिकायतें की गई थी। जिसमें से एक शिकायत डीसी नवांशहर द्वारा सिविल सर्जन नवांशहर को जांच के लिए सौंपी गई थी। इस मामले में सिविल सर्जन के आदेशानुसार डीएमसी द्वारा विस्तृत जांच के उपरांत एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिसे मद्देनकार रखते हुए सिविल सर्जन द्वारा डायरैक्टर सेहत व परिवार भलाई विभाग को पत्र नं 1089 मिति 01-07-2020 आरोगया मित्रा की भर्ती करने वाली निजी कंपनी एमडी इंडिया को डीसी रेट से कम सैलरी देने का दोषी पाते हुए बनती कारवाई करने के लिए सिफारिश की गई थी।

क्या है डीएमसी की जांच रिपोर्ट ?

डीएमसी नवांशहर की तरफ से अपनी जांच रिपोर्ट में कहा गया था, कि 20 अगस्त 2019 को पंजाब में आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। इस स्कीम को चलाने के लिए और अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीकाों के केसों के क्लेम फाईल करने के लिए आरोगया मित्रा की पोस्ट पर स्टाफ नियुक्त करने के लिए नवांशहर में 7 लोग ग्रीटिस इंडिया प्राईवेट कंपनी द्वारा भर्ती किए गए थे। जिन्हें ईएसआई और ईपीएफ काटने के पश्चात 11,500 प्रति महीना की दर से सैलरी दी जाती थी।
दिसंबर 2019 में स्टेट हैल्थ एजैंसी द्वारा पंजाब में मैनपावर मुहैय्या करवाने के लिए टैंडर जारी किया गया था, जिसमें एमडी इंडिया टीपी कंपनी को ठेका प्राप्त हुआ। टैंडर के अनुसार सरकारी अस्पताल द्वारा किए गए हर एक क्लेम में हर मरीज के लिए 185 रूपए कंपनी को क्लेम से काटकर दिए जाते हैं। कंपनी द्वारा डीसी रेट पर सैलरी न देते हुए किसी को 7200, किसी को 8000 तो किसी को 9000 रूपए दिए जा रहे हैं। जबकि कंपनी ऐसा नहीं कर रही है। इसलिए डीएमसी द्वारा सिफारिश की गई थी, कि कंपनी द्वारा आरोगया मित्रा को डीसी रेट पर सैलरी देने के साथ-साथ ईएसआई और ईपीएफ आदि भी दिया जाए। इसके साथ ही उनसे बकाया राशि भी वसूल की जाए।

इस संबधी जब स्टेट हैल्थ एजैंसी के सीईओ से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, जिससे उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। HNI सदैव सच्चाई की आवाज बुलंद करने के लिए वचनबद्व है, जैसे ही सीईओ का पक्ष प्राप्त होगा, उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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