कपूरथला पुलिस की शर्मनाक तस्वीर आई सामने -7 घंटे तक एक बेकसूर बेटी को परिवार सहित थाने में बैठाकर की पूछताछ

कपूरथला पुलिस की शर्मनाक तस्वीर आई सामने -7 घंटे तक एक बेकसूर बेटी को परिवार सहित थाने में बैठाकर की पूछताछ

– एडीजीपी की बेटी द्वारा गलत नंबर पर भेजे गए मैसेज के बाद मचा सारा बवाल
– शादी से ठीक 20 दिन पहले एक बेटी के साथ हुए इस घटनाक्रम ने पुलिस के कामकाज पर उठाए कई सवाल
– आप ही फैसला कीजिए, क्या किसी बड़े पुलिस अधिकारी की बेटी ना होकर आम व्यक्ति की बेटी होना है अपराध?

 

 

(HNI ब्यूरो) : एक तरफ सीनियर आईपीएस अधिकारी और दूसरी तरफ एक मजदूर। दोनों की बेटियों की फोन पर बात हुई। नतीजा यह निकला कि मजदूर के परिवार को सारा दिन थाने में प्रताड़ित होना पड़ा। क्या आईपीएस की बेटी ने भी चंडीगढ़ के किसी थाने में यूं ही घंटों बिताए होंगे। यह सवाल हम पंजाब पुलिस के मुखी डीजीपी दिनकर गुप्ता के लिए छोड़ रहे हैं। कपूरथला पुलिस से जुड़ी यह घटना 23 सितंबर की है।

कपूरथला जिले के एक थाने में गरीब माता-पिता, बेटी, और होने वाले दामाद से पूछताछ जारी थी। एसएचओ की टीम उन्हें सुबह ही घर से बुला लाई थी। बेटी की शादी 20 दिन बाद है। पूरे गांव में लोग पूछ रहे थे आखिर हुआ क्या है।

असल में पंजाब पुलिस के एक एडीजीपी रैंक के अधिकारी की बेटी ने 22 सितंबर को कपूरथला जिले के एक युवक के मोबाइल पर कुछ मैसेज भेज दिए थे। मैसेज पढ़कर समझा जा सकता था कि डीजीपी की बेटी वह मैसेज किसे भेजना चाहती थी। खैर, मैसेज गलत नंबर पर चले गए।

जिस युवक के मोबाइल पर डीजीपी की बेटी के मैसेज पहुंचे वह प्लंबर का काम करता है। युवक को लगा यह उसकी मंगेतर की शरारत है। युवक अपनी मंगेतर को फोन करके कहता है कि “मैं आपकी शरारत में फंसने वाला नहीं।” युवक की मंगेतर कंप्यूटर टीचर है। पिता ने मजदूरी करके उसे पढ़ाया है। वह बोली “मैंने तो कोई ऐसी शरारत नहीं की। मुझे बताओ किस नंबर से आपको इस तरह के मैसेज आ रहे हैं।”

कंप्यूटर टीचर ने अपने मंगेतर से कहा मुझे नहीं पता कि यह कौन है जो आपको इस तरह के मैसेज भेज रही है। वह उस नंबर पर कॉल करती है। दूसरी ओर एक अनजान लड़की फोन उठाती है। कंप्यूटर टीचर आक्रामक होकर कहती है कि “आप दोबारा इस नंबर पर मैसेज या कॉल न करें। वह मेरा होने वाला पति है।” यह कहकर कंप्यूटर टीचर ने फोन काट दिया। मगर उस ओर बैठी लड़की बार बार फोन करती रही। टीचर ने बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया।

सुबह होते ही पुलिस की गाड़ियां टीचर के घर के बाहर पहुंच जाती हैं। आरोप लगता है कि उनके नंबर से डीजीपी साहब की बेटी को गालियां निकाली गई हैं। टीचर के मोबाइल में चल रहा सिम उसके पिता के नाम पर था। पुलिस को टीचर बताती है कि सिम मैं इस्तेमाल करती हूं। पुलिस तुरंत पूरे परिवार को थाने चलने के लिए कहती है। वहां से उन्हें डीएसपी के सामने पेश किया जाता है।

डीएसपी टीचर का मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेते हैं। उससे पूछा जाता है कि रात को इस नंबर पर किसने गालियां निकालीं। टीचर पुलिस को पूरी बात बताती है कि किस तरह से उसके मंगेतर के फोन पर किसी अनजान लड़की ने मैसेज भेजे।

“मैंने फोन करके उस लड़की को थोड़ा डांट दिया था कि दोबारा कॉल या मैसेज न करना। बस यही बात हुई थी। कोई गाली नहीं निकाली। लेकिन वह लड़की बार बार कॉल कर रही थी। हमने फिर कोई बात नहीं की।” पुलिस ने टीचर की यह बात सुनकर उसके मंगेतर को भी थाने में बुला लिया।

दिन बीतता गया। कभी पुलिस टीचर का मोबाइल मांगती, तो कभी उसके 26 वर्षीय मंगेतर का। थोड़े समय बाद फोन में लॉक लग ही जाता है। ऐसे में पुलिस वाले थोड़ा गुस्से में बोलते हैं कि तुम्हारे फोन पर बार बार लॉक लग जाता है। इसे हटा दो। उनके फोन में मौजूद उनकी तस्वीरें, उनके मैसेज और सारी प्राइवेट जानकारी अब पुलिस के हाथ में थी। खैर दोनों इस बात पर अडिग थे कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। मगर पुलिस को अपने बड़े साहब को रिपोर्ट जो भेजनी थी। इसलिए जल्दी का तो कोई सवाल ही नहीं उठता।

टीचर के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स निकलवाई जाती हैं। उसके प्रिंट लिए जाते हैं। डीजीपी की लड़की को किए गए कॉल्स को हाईलाइट किया जाता है। डीएसपी अलग अंदाज में कहते हैं कि हम आप लोगों को बचा रहे हैं। वहीं टीचर कहती है जब हमने कुछ गलत किया ही नहीं तो हमें किस चीज का डर होगा। आप हमें किस बात से बचा रहे हैं।

डीएसपी फिर कहता है कि आप लिख कर दे दो कि आपसे गलती से फोन हो गया था और आपने साहब की बेटी को गालियां निकाल दीं। टीचर फिर बोली- हमने कोई गाली नहीं निकाली। हमने तो बस यही कहा कि दोबारा इस नंबर पर कॉल मत करना। वह मेरा होने वाला पति है।

डीएसपी ने जाते जाते फिर कहा- अगर जरूरत पड़ी तो कल फिर आना पड़ेगा। परिवार वाले सिर हिलाते, हाथ जोड़े डीएसपी के कमरे से बाहर निकल जाते हैं। दूसरे कमरे में एक पुलिस वाला एक कागज पर कुछ लिखता है। नीचे टीचर, उसके मंगेतर के दस्तखत लिए जाते हैं। सभी के चेहरे पर राहत देखी जा सकती थी। ठीक वैसे जैसे कोई बड़ा संकट टल गया हो।

यह पंजाब पुलिस का काम करने का तरीका है। अपने बच्चों की चिंता हर माता पिता को होती है। इस मामले में क्या एडीजीपी की बेटी ने शिकायत दर्ज कराई थी? क्या इसी तरह 7 घंटे तक एडीजीपी भी चंडीगढ़ के किसी थाने में बैठे रहे होंगे। क्या घंटों हाथ जोड़े एडीजीपी, उनकी पत्नी, उनकी बेटी और होने वाले दामाद को बेइज्जत होना पड़ा होगा?

एडीजीपी एक बुद्धिजीवी हैं। उन्हें साहित्य में रूचि है। मगर क्या उन्हें पता है कि कपूरथला पुलिस ने उस परिवार के साथ किस तरह से पूछताछ की? अमूमन बड़े अधिकारी इस तरह से व्यवहार नहीं करते। कई बार छोटे अधिकारी अपने साहब को खुश करने के चक्कर में ऐसी हरकतें कर देते हैं।

सवाल?
क्या पुलिस 7 घंटे में यह पता नहीं कर पाई कि यह महज गलती से भेजे गए मैसेज का मामला था? इसे अनदेखा भी किया जा सकता था।

अगर यह शिकायत वह प्लंबर युवक करता तो क्या किसी थाने में एडीजीपी और उनकी बेटी को 7 घंटे तक प्रताड़ित किया जाता?

दोनों पंजाब की बेटियां हैं। मगर थाने में प्रताड़ित कौन हुआ ? उसी से पता चल जाता है कि पंजाब पुलिस के लिए बेटी का मतलब क्या है।

– आप ही फैसला कीजिए, क्या किसी बड़े पुलिस अधिकारी की बेटी ना होकर आम व्यक्ति की बेटी होना है अपराध?

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