अपनी मातृभाषा के प्रति ईमानदार हुये बगैर हम कोई भी अन्य भाषा समुचित तरीके से सीख हीं नहीं सकते” -“सारस “

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अपनी मातृभाषा के प्रति ईमानदार हुये बगैर हम कोई भी अन्य भाषा समुचित तरीके से सीख हीं नहीं सकते” -“सारस “

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष

(एस कुमार) मातृभाषा के बिना किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। मातृभाषा हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना उत्प्रेरित करती है।लेकिन वेस्टर्न भाषा क़ो अपनाकर हमारे देश के भविष्य और धरोहर बच्चे अपनी दिशा से भटक रहे हैं।

उक्त बातें पंजाब की बेहद चर्चित और मुखर संस्था”सारस”के डाईरेक्टर एस. के. चौधरी ने कही। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा की हम सब के आदर्श पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम सर तक ने इस बात क़ो स्वीकार किया था की अगर वह अपनी मातृभाषा पर पकड़ नहीं रखते तो वैज्ञानिक कभी नहीं बनते।

श्री चौधरी ने विशेषकर अभिभावकों क़ो अपने बच्चों में मातृभाषा के प्रति लगाव क़ो लेकर पहल करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया की ज़ब तक आपका बच्चा अपनी मातृभाषा पर अपनी पकड़ क़ो मजबूत नहीं बनाता है, वह अन्य भाषाओं क़ो ठीक से सीख हीं नहीं सकता।

इसलिए स्कूलों की भेड़चाल में न पड़कर अपने बच्चों के सर्वाँगीन विकास के लिये उन्हें अपनी मातृभाषा क़ो अपनाने के लिये जरूर कहें, अन्यथा आपका बच्चा किसी भी दुसरी भाषा क़ो समुचित तरीके से कभी भी नहीं सीख पायेगा।

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