अगर किसानों ने पूरी तरह से धरना हटाया तो हम भी रेल सेवाएं चलाने के लिए तैयार-डीआरएम

drm rajesh aggarwal

अगर किसानों ने पूरी तरह से धरना हटाया तो हम भी रेल सेवाएं चलाने के लिए तैयार-डीआरएम

(HNI ब्यूरो, जालंधर) किसानों द्वारा 23 नवंबर से रेलवे संपत्ति से हर तरह के धरने हटाने के ऐलान के बाद रेलवे का भी आधिकारिक बयान आ गया है। फिरोजपुर मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने हवाले से जो प्रेस नोट जारी हुआ है उसके मुताबिक रेलवे सेवाएं शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रेलवे ने एक ब्रीफ प्रेस नोट जारी करते हुए रेल सेवाएं चलाने पर हामी भरी हैः

नीचे पढ़ें रेलवे ने क्या बयान जारी किया है👇:

 

प्रेस विज्ञप्ति
मंडल कार्यालय, फिरोजपुर
दिनांक-21.11.2020

मंडल रेल प्रबंधक श्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि ऐसी सूचना मिली है कि किसानों के द्वारा 23 नवंबर से धरना उठा दिया जाएगा और जैसे ही उनके द्वारा धरना उठाने की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी तो रेलवे भी अपनी सेवाओं को बहाल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इससे पहले किसान संगठनों और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच शनिवार को एक बैठक हुई थी जिसमें किसान रेल पटरियों से धरने हटाने के लिए राजी हो गए थे। चंडीगढ़ के किसान भवन में भारत किसान यूनियन और सीएम कैप्टन के बीच हुई बैठक में किसानों ने शर्त पर यह फैसला किया था। किसान संगठनों का कहना है कि 23 नवंबर, 2020 से 15 दिन के लिए हम रेलवे की माल और पैसिंजर गाड़ियों को चलने देंगे। 15 दिन के अंदर अंदर केंद्र सरकार को हमारे साथ मीटिंग करनी होगी।

किसानों के साथ मीटिंग करते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़

असल में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 3 महीनों से आंदोलन कर रहे हैंं। इन कानूनों से किसानों को अपनी फसल पंजाब से बाहर बेचने की आजादी दी गई थी। पंजाब के किसान अपने फल और सब्जियां तो पूरे देश में कहीं भी बेच रहे थे लेकिन उन्हें गेहूं और धान बेचने की अनुमति नहीं थी।

सालों से किसान फूड एजेंसियों और आढ़तियों के चंगुल में फंसा था। हालांकि नए कानून में कहीं नहीं लिखा कि सरकार खरीददारी बंद कर रही है लेकिन फिर भी किसान संगठनों और विपक्षी दलों को लगता है कि प्राइवेट कंपनियां उनका धान खरीद लेंगी और मंडी सिस्टम खत्म हो जाएगा। साथ ही किसानों को डर सता रहा है कि प्राइवेट कंपनियां उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेंगी। जबकि कानून में ऐसी कोई बात नहीं लिखी है। भविष्य के इस डर के चलते किसान संगठन धरने पर बैठे हैं और उनकी मांग है कि या तो इस कानून में संशोधन हो या कानून हटाए जाएं।

पिछले दो महीनों से पंजाब में रेलगाड़ियां बंद हैं। रेलवे लाइनों और रेलवे स्टेशनों के आस पास किसान धरना डाले बैठे हैं। रेलवे ने साफ साफ कहा था कि जबतक रेलवे संपत्ति को किसानों से खाली नहीं करवा लिया जाता वह किसी भी तरह की रेल सेवा को शुरू नहीं करेंगे। शनिवार शाम 6:50 पर जारी बयान में रेलवे के फिरोजपुर मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने कह दिया है कि अगर किसान पूरी तरह से धरने हटाते हैं तो वह भी रेल सेवाएं शुरू कर देंगे।

बड़े सवाल:

  • अगर 15 दिन में केंद्र और किसान संगठनों की बैठक नहीं होती है तो क्या फिर से किसान रेल ट्रैक जाम कर देंगे।

  • अगर 23 को रेल सेवाएं बहाल भी हो जाती हैं तो क्या यह राहत थोड़े दिनों की ही है।

  • पंजाब के लाखों लोग अंबाला और दिल्ली से रेलगाड़ियां पकड़ रहे हैं। क्या किसानों को उन्हें परेशान करने का अधिकार है?

  • क्या सूबे की सरकार के साथ मिलकर कुछ संगठन अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं?

  • क्या इस प्रदर्शन ने पंजाब के विकास को थामने की ठान रखी है?

  • पंजाब की इंडस्ट्री और व्यापार को होने वाले घाटे की जिम्मेदारी किसकी है?

  • प्रदर्शन के नाम पर ब्लैकमेलिंग कब बंद होगी?

 

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