“माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षा जगत के माफिया माननीय डी.सी के आदेश पर चलेंगे क्या…?-“सारस””

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“माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षा जगत के माफिया माननीय डी.सी के आदेश पर चलेंगे क्या…?-“सारस””

अभिभावकों में गुपचुप चर्चा का माहौल गर्म की…. सब मिले हुये हैँ :-चेयरमैन”सारस”

 

(एस.कुमार ):  निजी स्कूलों के खिलाफ शहर के जागरूक अभिभावकों द्वारा कल के धरना प्रदर्शन को प्रशासन द्वारा गंभीरता से लेने की जरूरत है। अब जबकि अभिभावक अपने अधिकारों को लेकर जग चुके हैं, उनकी मांगों पर सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को गौर करना ही चाहिए। यह बातें आज पंजाब की बेहद चर्चित और मुखर संस्था “सारस “के बोर्ड डायरेक्टर शंकर कुमार चौधरी नें कही हैँ।

 

एक विशेष भेंट वार्ता के दौरान श्री चौधरी ने कहा है कि वह और उनकी संस्था “सारस “एक लंबे समय से निजी स्कूलों की धक्केशाही के खिलाफ अभिभावकों को उनके अपने अधिकार के लिए सजग करती आ रही है, जिसका सुखद परिणाम अब देखने को मिल रहा है। हालांकि उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर एक बार फिर से अभिभावकों को ही कटघरे में खड़ा किया है।

 

 

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है की अपने अधिकारों के लिए जगने और गोलबंद होने में अभिभावक वर्ग नें देरी की है,उन्होंने और उनकी संस्था”सारस”ने माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के अब तक के आदेशों को लेकर हर दिन और हर सप्ताह के अंत में विशेषकर अभिभावकों को जगाने का काम किया है। फिर भी 15%अभिभावकों तक ने भी आज तक स्कूलों को लिखित रूप से फीस मांफी या उनके अनुचित धक्के को लेकर आवेदन पत्र तक देना उचित नहीं समझा।

 

 

वह शहर के नामचीन निजी स्कूल प्रबंधको, डीईओ और माननीय डीसी को व्यक्तिगत रूप से मिलकर अब तक अनेको अभिभावकों को न्याय दिला चुके हैँ, जब की समाज या सोसायटी में जागरूक अभिभावकों की संख्या आज भी बहुत कम है.अगर निजी स्कूलों नें अब तक हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है तो माननीय डीसी या डीईओ के आदेश को वह गंभीरता से लेंगे भी, इस पर भी उन्हें संदेह है। अपने स्पष्ट और तीखे चुभते सवालों की फेहरिस्त को लेकर प्रशासनिक अमलों में बेहद चर्चित श्री चौधरी ने बगैर किसी लाग लपेट के कहा है कि अब तक जिस किसी जागरूक संगठन, व्यक्ति विशेष या संस्था नें निजी स्कूली माफिया सरगनाओं या सरकारी पदाधिकारीयों के बगैरत,अनर्गल, नियम क़ानून से परे या अनैतिक आदेशों के खिलाफ जाने की कोशिश की है उसके खिलाफ चार्जशीट और मुकदमे में फसाने की प्रक्रिया उनकी नीयत को बताने के लिये काफी है.

 

निजी स्कूलों नें कोरोना काल से अबतक कमोबेश इमोशनल ब्लैकमेलिंग के जरिये 90%अभिभावकों से फीस वसूले हैँ जबकी अपने टीचरों को उनकी सैलरी तक नहीं दी है यह सब क्या है?उन्होंने अभिभावकों से एक बार फिर संस्थागत अपील की है की इन अनैतिक मक्कारों के खिलाफ कम से कम अब एकजुट हो जाएँ,इनकी नीयत को परखें, अन्याय का खुलकर विरोध करें. माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट के अब तक के आदेशों को लेकर जागरूक रहें जो आपके हितों की वकालत करती है।

1 Comment

  • vreyro linomit
    April 13, 2021

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