लिंग जांच और कोख में बेटियां मारने का अड्डा था रतन अस्पताल!, डॉ. बलराज गुप्ता पर पर्चा दर्ज

DR BALRAJ GUPTA PNDT (1)

लिंग जांच और कोख में बेटियां मारने का अड्डा था रतन अस्पताल!, डॉ. बलराज गुप्ता पर पर्चा दर्ज

कुड़ी मार अस्पताल के डॉ. बलराज गुप्ता ने बताया कि गर्भवती महिला की कोख में लड़की है- शिकायतकर्ता

रवि रौणखर, जालंधर

रतन अस्पताल के मालिक डॉ. बलराज गुप्ता पर गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताने के आरोप में पीएनडीटी एक्ट के तहत पर्चा दर्ज हो गया है। केस में डॉ. बलराज गुप्ता के अलावा पूनम नाम की महिला जो कि दलाल का काम करती थी को भी आरोपी बनाया गया है। धारा 420, 120-B और पीसी-पीएनडीटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।  अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन भी सील कर दी गई है। कई सूचनाएं मिल रही हैं जिसमें जानकार बता रहे हैं कि रतन अस्पताल लिंग जांच का बड़ा अड्डा था!

पंजाब पर पहले ही कुड़ी मार सूबे का दाग लग चुका है

सोमवार 3 नवंबर की दोपहर तीन बजे सेहत विभाग द्वारा तैनात एक एजेंसी ने अस्पताल में छापा मारा। एजेंसी को पुख्ता सूचना मिली थी कि शहीद उधम सिंह नगर स्थित रतन अस्पताल में गर्भ में पल रहे बच्चों की लिंग जांच की जाती है। स्कैनिंग से बताया जाता है कि पेट में लड़का है या लड़की। बाद में अगर लड़की हो तो उसका अबॉर्शन करवा दिया जाता था। इस मामले में डॉ. गुप्ता पर आरोप लगा है कि उन्होंने 4 माह की एक गर्भवती महिला की अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की।

बाद में डॉ. गुप्ता ने बताया कि उनके गर्भ में लड़की पल रही है। डॉ. गुप्ता पर आरोप लगा है कि उन्होंने इस काम के 25000 रुपए लिए। फिलहाल डॉ. गुप्ता फरार हो चुके हैं। खबर लिखे जाने तक सिविल सर्जन, गर्भवती महिला और छापा मारने वाली टीम थाना 4 में मौजूद थे।

मगर हैरानी की बात है कि पुलिस चाहती तो डॉ. गुप्ता से मौके पर 25000 रुपए बरामद कर सकती थी लेकिन उन्होंने छापा मारने आई टीम को ही थाने में पहुंचा दिया और लिंग जांच के लिए लिए गए पैसे बरामद नहीं कर पाई। छापा मारने वाली टीम ने भी पुलिस पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने आरोपी डॉक्टर को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गुंडा कह दिया। उन्हें थाने ले आए और केस को कमजोर कर दिया।

इस मामले में पुलिस और सेहत विभाग की भूमिका भी पूरी तरह से शक के घेरे में है। पुलिस और सेहत विभाग वाले डॉ. गुप्ता को बचाने में लगे हैं। इसका खुलासा एचएनआई की लाइव रिपोर्टिंग में साफ साफ देखा जा सकता है।

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें। वीडियो पूरा देखें और खुद ही बताएं कि क्या इस तरह से पंजाब की बेटियों को कातिलों को पकड़ा जाएगाः
https://fb.watch/1xfkuGxPeM/

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सेहत विभाग द्वारा मिशन डिस्कवरी डिटेक्टिव एजेंसी को पंजाब में स्कैनिंग सेंटर्स पर रेड मारने का ठेका दिया गया है। इस एजेंसी का काम उन डॉक्टरों और अस्पतालों को पकड़ना होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग पता करने वाला टेस्ट करते हैं। एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विशाल पुरी ने बताया कि हमें पक्का पता चला था कि रतन अस्पताल जालंधर में पेट में लड़का है या लड़की वाला स्कैनिंग टेस्ट किया जा रहा था।

हमें यह भी पता चला था कि यहां हर महीने लगभग 15 ऐसे अबॉर्शन होते हैं जिनका लिंग निर्धारण टेस्ट हुआ करता था। यानी अस्पताल पंजाब का लिंग जांच का एक बड़ा अड्डा था। अब यह पूनम ही बता सकती है जो बिचौलिए का काम करती थी। पूनम ही सोमवार को गर्भवती महिला का टेस्ट करवाने के लिए रतन अस्पताल आई थी।

गर्भवती महिला की रिश्तेदार रुपाली ने बताया कि वह मौके पर मौजूद थी। हमें पूनम नाम की महिला यहां लेकर आई थी। उसने शहीद उधम सिंह नगर के पास हमें आने को कहा। हम आ गए। यहां वह हमें रतन अस्पताल ले आई। उसे हम पर शक भी हो रहा था। पूनम बार बार कह रही थी कि अगर कुछ गड़बड़ हुई तो यहां हंगामा हो जाएगा। हमारे फोन फ्लाइट मोड पर लगवा दिए गए। सबकुछ बहुत चुपके से हो रहा था। वह गर्भवती महिला को स्कैनिंग सेंटर में ले गई। स्कैनिंग में कुछ मिनट लगे। उसके बाद पूनम ने हमें बताया कि गर्भ में लड़की है।

रुपाली ने बताया कि मैं बाथरूम में गई और मिशन डिस्कवरी वालों को मैसेज कर दिया। उनकी टीम तुरंत अस्पताल में आ गई और टीम ने पैसे रिकवर करने के लिए डॉक्टर से पैसे मांगे। डॉक्टर ने हंगामा कर दिया।

मिशन डिस्कवरी के विशाल पुरी ने बताया कि डॉक्टर यूं करने लगा जैसे उसे कुछ हो गया हो। वह कहने लगा मुझे घबराहट हो रही है। उसके बाद हमने कंट्रोल रूम और सिविल सर्जन को कॉल की। हम डॉक्टर से पैसे मांगने लगे लेकिन डॉक्टर ने हम पर हमला कर दिया। वह 100 हो गए और हम महज 10 लोग थे। हमारे साथ गुंडों जैसा व्यवहार होने लगा। पुलिस वाले भी हमारा साथ देने की बजाय हमें ही दोषी ठहराने लगे। हमें डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिस ने पंजाब में लिंग जांच करने वाले अस्पतालों को पकड़ने का कांट्रेक्ट दे रखा है। हम प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी हैं।

यहां से हमें थाने ले आए जबकि पैसे तो डॉ. बलराज गुप्ता के पास थे। तभी पैसे रिकवर कर लेते तो केस मजबूत हो जाता। मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया।

मुझे काम कर लेने दो- डॉ. बलराज गुप्ता

थाने में एचएनआई के रिपोर्टर ने जब बलराज गुप्ता से आरोपों पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो वह तुरंत थाने से बाहर भाग गए। हालांकि जाते जाते डॉ. गुप्ता ने कहा कि मुझे काम कर लेने दो। मैं बाद में बताता हूं। यह कहकर डॉ. गुप्ता चले गए। हालांकि सवाल यह भी उठता है कि पेट में बेटियों को मारने का जिस डॉक्टर पर आरोप लगा हो उसे थाने से पुलिस ने जाने कैसे दिया। यह पहला मामला नहीं है जब पुलिस ने इस तरह से लिंग जांच करने वाले डॉक्टरों को मौके से फरार करवाया हो।

क्या नवांशहर के डीएफपीओ आरोपी डॉक्टर के साथ हैं?

वीडियो में पाठक देख सकते हैं कि नवांशहर के जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. सुखविंदर सिंह किस तरह से मिशन डिस्कवरी के विशाल पुरी को संदेहास्पद तरीके से बयान देने से रोका। डॉ. सुखविंदर की भूमिका की भी इस मामले में जांच होनी चाहिए। यही कारण है कि पंजाब सरकार को जासूस कंपनी से काम लेना पड़ रहा है। सरकारी अधिकारियों ने अक्सर इस तरह के मामलों में आरोपी डॉक्टरों को बचाने का काम किया है।

बाघा अस्पताल भोगपुर में भी सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारियों के तबादले हुए थे

बाघा अस्पताल भोगपुर में भी अंबाला सेहत विभाग टीम ने छापा मारा था। उसमें भी पुलिस और सिविल सर्जन दफ्तर की भूमिका सदिग्ध रही थी। इस खबर के रिपोर्टर ने उस मामले में कई खुलासे किए थे जिसके बाद सिविल सर्जन दफ्तर की जिला परिवार कल्याण अधिकारी और सिविल सर्जन का तबादला हो गया था। उस मामले में सिविल सर्जन दफ्तर की टीम मौके पर समय पर नहीं पहुंची थी। तभी मौके से डॉ. एचएस कंग फरार हो गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ. कंग आज भी स्कैनिंग कर रहे हैं।

आगे क्या?

अगर सेहत विभाग ने सही से जांच की तो अल्ट्रासाउंड मशीन की हार्ड डिस्क से लिंग जांच की क्लिप से साफ हो जाएगा कि डॉ. बलराज गुप्ता ने गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग पता किया था। साथ ही शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि डॉ. गुप्ता ने उन्हें बताया है कि गर्भ में बेटी पल रही है। यह सारी बातें इस बात को साबित कर देंगी कि छापा मारने आई टीम के आरोप सच्चे हैं। हालांकि पिछले मामलों पर नजर दौड़ाएं तो यह साफ है कि आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई होना लगभग असंभव है।

(गर्भवती की फोटो प्रतीकात्मक है)

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