15 दिन के लिए ट्रेनें चलने देंगे, अगर केंद्र के साथ मीटिंग नहीं हुई तो फिर चक्का जाम करेंगे- किसान संगठन

Farmers block railway track as they stage a protest against Farms act

15 दिन के लिए ट्रेनें चलने देंगे, अगर केंद्र के साथ मीटिंग नहीं हुई तो फिर चक्का जाम करेंगे- किसान संगठन

(HNI ब्यूरो, जालंधर) किसान संगठन और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच शनिवार को हुई बैठक में किसान रेल पटरियों से धरने हटाने के लिए राजी हो गए हैं। चंडीगढ़ को किसान भवन में भारत किसान यूनियन और सीएम कैप्टन के बीच हुई बैठक में किसानों ने शर्त पर यह फैसला किया है। किसान संगठनों का कहना है कि 23 नवंबर, 2020 से 15 दिन के लिए हम रेलवे की माल और पैसिंजर गाड़ियों को चलने देंगे। 15 दिन के अंदर अंदर केंद्र सरकार को हमारे साथ मीटिंग करनी होगी। अब देखना होगा कि रेलवे इस शर्त पर पंजाब में गाड़ियां चलाता है या नहीं।

किसानों के साथ मीटिंग करते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़

असल में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 3 महीनों से आंदोलन कर रहे हैंं। इन कानूनों से किसानों को अपनी फसल पंजाब से बाहर बेचने की आजादी दी गई थी। उससे पहले सरकार ही गेहूं और धान की खरीददारी करती थी। हालांकि नए कानून में कहीं नहीं लिखा कि सरकार खरीददारी बंद कर रही है लेकिन फिर भी किसान संगठनों और विपक्षी दलों को लगता है कि प्राइवेट कंपनियां उनका धान खरीद लेंगी और मंडी सिस्टम खत्म हो जाएगा। भविष्य के इस डर के चलते किसान संगठन धरने पर बैठे हैं और उनकी मांग है कि या तो इस कानून में संशोधन हो या कानून हटाए जाएं।

पिछले दो महीनों से पंजाब में रेलगाड़ियां बंद हैं। रेलवे लाइनों और रेलवे स्टेशनों के आस पास किसान धरना डाले बैठे हैं। रेलवे ने साफ साफ कहा था कि जबतक रेलवे संपत्ति को किसानों से खाली नहीं करवा लिया जाता वह किसी भी तरह की रेल सेवा को शुरू नहीं करेंगे।

रेलवे की ओर से बयान आने की प्रतीक्षा की जा रही है। क्या रेलवे सशर्त गाड़ियां चलाने के लिए लिए राजी होगा? क्या पंजाब में चल रहा यह गतिरोध थमेगा। इन सवालों के जवाब अभी मिलने बाकी हैं।

(फोटो साभार- बिजनेस स्टैंडर्ड)

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