खरयालता सर्वसम्मति से पंचायत बनाता है तो फूट डालने वालों को मिलेगा करारा जवाब

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खरयालता सर्वसम्मति से पंचायत बनाता है तो फूट डालने वालों को मिलेगा करारा जवाब

रवि रौणखर, खरयालता

आखिर क्यों सदाशिव ध्यूंसर महादेव के चरणों में बसा खरयालता 2021 में भी समस्याओं से घिरा है? खरयालता के अलावा डीहर और टकोली पंचायतों के इलाके भी पिछड़ चुके हैं। पानी और सड़क आज भी यहां बड़े मसले हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यहां के लोगों की आपसी फूट है। फौजी हो या दुकानदार, इंजीनियर हो या बेरोजगार, टीचर, पुजारी, एनआरआई, बिल्डर। पिछले 10 दिनों में 100 से ज्यादा लोगों से हुई बातचीत में यही निकल कर आ रहा है कि यहां का समाज आपस में बुरी तरह बंटा है। कोई जाति पर बंटा है तो कोई पार्टीबाजी में और कुछ अपने हितों की पूर्ति के लिए गुटबाजी में व्यस्त हैं। बांटने वाले थोड़े और बंटने वाले हजारों।

किसी को उदाहरण देखना हो तो तलमेहड़ा में जरा खरीददारी कर ली जाए। दशकों से यहां दुकान चला रहे एक बुद्धिजीवी का कहना है कि “एक बार एक शख्स मेरी दुकान से सामान खरीद कर चला गया। थोड़ी देर बाद उसे किसी का कॉल आया। कॉल करने वाला कह रहा था कि “क्या हो गया? तुमने पार्टी छोड़ दी। खरीददार ने पूछा तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो? कॉल करने वाले ने कहा “पता चला है कि तुमने विरोधी पार्टी वाले से सामान खरीदा है?”

बेचारा सामान खरीदने वाला खुद को ठगा ठगा सा महसूस कर रहा था। वह इस गलतफहमी में था कि दुकानदार उसकी पार्टी का ही बंदा था। दुकानदार ने बताया कि “बस उस दिन से वह मुड़कर मेरी दुकान पर नहीं आया। यहां कुछ लोगों के आपसी मनमुटाव और रंजिश के चलते हर घर और हर दुकान पर पार्टियों का ठप्पा लग चुका है। बहुत कोशिश करके देख ली लेकिन यहां कभी भी आम सहमति से पंचायत नहीं बन सकती।”

यह कैसा समाज है? जिसमें खुलकर किसी से बात करने की भी आजादी नहीं। लगभग 200 से 250 साल पहले कुछ लोग पंजाब से आए तो कुछ लोग जम्मू और कुछ तब के पंजाब और आज के हिमाचल के अलग अलग हिस्सों से आकर यहां बसे। उन्होंने यहां के जंगल साफ किए और खेती लायक जमीन तैयार की। दो सदियों तक यहां के लोग लाख मुसीबतों पर भी एकजुट रहे।

30-40 साल पहले तक भी ज्यादातर लोग एक दूसरे से प्रेम भाव रखते थे। जमीनों के छोटे मोटे विवाद छोड़ यहां का माहौल ठीक ठाक रहा। मगर आज आपसी वैर चरम पर है। यहां खूनी झड़पें भी हुईं। एक दूसरे पर फर्जी मुकद्दमे भी दायर किए गए। कुछ लोगों की महत्वकांक्षाओं ने समाज में फूट के बीज बो दिए। धीरे-धीरे हल्की दरारें खाई का रूप धारण कर गईं।

जरा अब थोड़ा पीछे चलते हैं। देश गुलाम था। 1937 में दक्षिण भारत में एक घटना घटित हुई। एक जज साहब ने नौकरी छोड़ी और खरयालता की ओर चल पड़े। लगभग 10 साल बाद वह खरयालता पहुंचे और इलाके के लोगों को पौराणिक शिवलिंग के बारे में बताया। सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर की स्थापना की। जज साहब को स्वामी ओंकारानंद जी गिरि के नाम से जाना जाता है। आज से लगभग 30 साल पहले स्वामीजी का निधन नदौन में हुआ। मगर सांसारिक यात्रा पूरी करने से पहले वह इस इलाके को मंदिर के रूप में एक सौगात दे गए थे।

कहा जाता है कि इस मंदिर में भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। शिव मंदिर की ख्याति बढ़ती गई। भोलेनाथ के प्रताप से दूर दूर से श्रद्धालु आने लगे। इस इलाके की पहचान अब सदाशिव मंदिर से ही जानी जाती है। मगर खरयालता के लोगों को यह ख्याति रास न आई। मंदिर पर सियासत शुरू हो गई। जब खरयालता ही बंटा हुआ था तब कुछ बाहरी नेता भी इस राजनीति में कूद पड़े। आए दिन मंदिर प्रबंधन पर आरोप लगने लगे। खरयालता की पंचायत की लड़ाई अब मंदिर में भी लड़ी जाने लगी।

एक नौजवान ने हमें बताया कि “ अब मैं तलमेहड़ा में किसी से बात करने से कतराता हूं। पता नहीं कोई मुझे किस धड़े का सदस्य समझ ले। मैने अब बाजार में बात करनी ही बंद कर दी है। यहां अजीब सा माहौल है।” इस माहौल का मुख्य कारण लोकल लोगों का अलग अलग पार्टियों में बंटना है। इस फूट का फायदा बड़े नेता भी उठा रहे हैं। तभी तो सदाशिव मंदिर को हिमाचल सरकार ने कानून बनाकर लगभग कब्जा ही लिया है। ऐसा करके खरयालता के लोगों ने साबित कर दिया कि राजनीतिक जीत के लिए वह अपने मंदिर को भी दांव पर लगा देंगे।

जो खरयालता में हुआ वही देश भर में हो रहा है। हिंदुओं के लगभग 1000 से अधिक मंदिर सरकार कब्जा चुकी है। मगर अभी तक एक भी उदाहरण नहीं मिला है जिसमें किसी गुरुद्वारे, मस्जिद या चर्च को सरकार ने अपने अधीन लिया हो। यह हिंदू समाज के खोखलेपन और बंटवारे को भी दर्शाता है। जो समाज अपने मंदिर नहीं संभाल सकता वह आगे भी खंडित होता रहेगा।

इस इलाके में भाईचारा तभी कायम होगा जब यहां सर्वसम्मति से पंचायत चुनी जाएगी और दो गुटों के आपसी मतभेद सुलझाए जाएंगे। लोग जान लें कि इतिहास बार बार मौका नहीं देता। खरयालता के लोग तप्पे से बाहर देश दुनिया में अपनी सफलता के झंडे गाड़ चुके हैं। यहां के लोगों की योग्यता पर कोई सवाल खड़े नहीं कर सकता। फिर ऐसा क्या है कि यहां के लोग पार्टी के चक्कर में अपने इलाके की बलि देने को तैयार हैं। जबकि पंचायत चुनाव में कोई पार्टी अपने  चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ती।

देश के सरकारी दफ्तरों, पंचायतों, थानों और मंदिरों में अगर राजनेताओं का हस्तक्षेप कम होता है तो समाज आपस में एकजुट हो सकता है। पंचायत चुनाव भी उस दखल को कम करने का एक जरिया है। कोई पार्टी सीधे चुनाव नहीं लड़ सकती। आपको ताला-चाबी, कुर्सी, बस, दरवाजा, कलम जैसे चुनाव चिन्ह ही दिए जाते हैं। यहां हाथ या कमल का चिन्ह नहीं दिखता। असल में आपसी मनमुटाव मिटाने और सर्वसम्मति से विकास करने के लिए ही पंचायत चुनावों में ऐसी व्यवस्था की गई है।

हिमाचल में पंचायत चुनाव एक ऐसा मौका है जिसमें लोग आपसी भाईचारा कायम कर सकते हैं। इससे समाज को बांटने वाले राजनेताओं और पार्टियों को करारा जवाब मिलेगा। पंचायत चुनाव में पार्टी की नहीं अपने इलाके की सोचें। सर्वसम्मति से पंचायत चुनी जाती है तो 15 लाख रुपए सीधे पंचायत को मिलेंगे। अगर लोग इस 15 लाख को लात मार रहे हैं तो समझ जाना चाहिए कि कुछ लोगों के लिए चुनाव में जीत पैसा कमाने का एक साधन है। क्योंकि पंचायतों को सरकार से करोड़ों रुपए के फंड आ रहे हैं फिर भला 15 लाख की परवाह किसे?

(अगली स्टोरी- कौन हैं वो लोग जिन्होंने सदाशिव मंदिर को भी नहीं छोड़ा?
सरकार से अपने विभाग ढंग से चलते नहीं, वह मंदिरों को कैसे संभालेगी)

(नीचे दिए कमेंट बॉक्स में अपनी बात रखें या हमारे नंबर 7696310022 पर मैसेज या कॉल करें।)

6 Comments

  • Dinesh Sharma
    January 4, 2021

    15 lac is a huge amount. I am not sure if it’s correct.If that be so I strongly believe we should do this and set an example.

  • अशिवनी शर्मा
    January 4, 2021

    बहुत अतिसुंदर विचार है पर आज इन सब मुद्दों को को लोग भूल गये है

  • Sajan Thakur
    January 4, 2021

    Bhai y sarkari Karan kin ki bjh say ho RHA h aap yr aaj say pehlay kha thay aap ager pehlay aaay hotay to stayed y sarkarikaran nhi hota and bholay nath honay bhi nhi dengay by the way aap kis party ki thinking rakhtay ho and Jo Kam pehlay nhi hua vo aaj hua h mandir may y bhi jaan lo aap and y sakshatkar h mandir ki development kis nay krai h

  • Ravi Sharma charoli
    January 5, 2021

    Very nice Ravi ji your are a true son of this area,, salute you,,we should think about it otherwise we had lost our brotherhood and faith among the people of this area,

  • Vikram Rana
    January 5, 2021

    Jb tk sb ek hoker nhi chlege..tb tk yhi haal rhega ..hr jgh ka

  • Sajan Bodh
    January 5, 2021

    Bhae Hume 15 lac Ka hisab do hum ek ek paisey Ka hisab day gay aap bhi aaj Mandir aye cash room kaa system Dekh Kay kuch samaj Gaye ho gay

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