“पास बन जाएगा” – “काैन कर रहा है जारी” – “कैसे मिलेगा” ?

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“पास बन जाएगा” – “काैन कर रहा है जारी” – “कैसे मिलेगा” ?

स्टेटस सिंबल के दीवाने पास बनवाने के लिए लगा रहे जुगाड़

जागरूकता की कमी व जानकारी के अभाव से कंट्राेल रूम में कर रहे फाेन

(HNI ब्यूराे) – गत दिवस प्रदेश सरकार द्वारा लगातार बढ़ते काेराना के मद्देनज़र कुछ अतिरिक्त सख्तियां बरतते हुए नए आदेश जारी किए गए थे। जिसे मिनी लाकडाऊन भी कहा जा रहा है। उक्त आदेश जारी हाेने के बाद आम जनता काे इस सबंधी जानकारी देने व जागरूक करने हेतु डीसी घनश्याम थाेरी द्वारा एक वीडियाे जारी करके बेहद विस्तारपूर्वक नई गाईडलाईनस काे लेकर समझाया गया था।

जहां एक तरफ डीसी द्वारा पूरी काेशिश की जा रही है, कि ज़िले में हर काेई इन गाईडलाईनस का यथावथ पालन करे, ताकि काेराना संक्रमण काे कंट्राेल किया जा सके। मगर वहीं दूसरी तरफ कुछ लाेग ऐसे हैं, जिन्हें न ताे अपनी काेई परवाह है न ही किसी दूसरे की। ऐसे लाेगाें काे ताे केवल अपने आस-पास यही दर्शाना है, कि वह वीआईपी हैं। उनकी पहुंच बहुत ऊंची है। जिसके चलते उन्हें इस मिनी लाकडाऊन में राहत प्राप्त है। स्टेटस सिंबल के ऐसे दीवाने लाेग पास बनवाने के लिए तहर-तरह के जुगाड़ फिट करने में हैं। जबकि फिल्हाल ऐसा काेई प्रावधान है ही नहीं।

15 मई तक काफी कड़ी पाबंदियां लागू हाेने के आदेश के बाद साेमवार सुबह से ही डीसी दफ्तर में ऐसे लाेगाें द्वारा इंक्ववायरी की जाने लगी, कि डीसी द्वारा दुकानें खाेलने या उनके बाहर घूमने संबंधी काेई पास ताे नहीं जारी किए जा रहे हैं।

बहुत से अधिकारियाें के पास लाेग या ताे फाेन कर रहे थे, या निजी ताैर पर जाकर पूछ रहे थे, कि उनका पास बन जाएगा ? बहुत से लाेग काेविड कंट्राेल रूम में फाेन करके भी ई-पास संबधी जानकारी मांग रहे हैं। जागरूकता की कमी के चलते लाेगाें का यही मानना है कि प्रशासन द्वारा ई-पास जारी किए जा रहे हैं। जिस वजह से वह अधिकारियाें व कर्मचारियाें से उक्त जानकारी मांग रहे हैं।

बेहद हैरान करने वाली बात है, कि ज़िला प्रशासन व अधिकारियाें का पूरा ज़ाेर इस तरफ लगा हुआ है, कि किसी तरह से काेराना पीड़ित मरीज़ाें के लिए आक्सीजन, जीवन रक्षक इंजैक्शन, वैटीलेटर, अस्पतालाें में बैड उपलब्ध करवाना आदि काे सुनिश्चित बनाया जा सके। मगर दूसरी तरफ कुछ लाेग ऐसे हैं, जिन्हें केवल अपने स्टेटस सिंबल काे दर्शाने के लिए डीसी से पास की दरकार है।

हालांकि डीसी व प्रशासन द्वारा पहले ही साफ किया जा चुका है, कि अगर काेई मज़दूर किसी इंडस्ट्री में काम करता है, ताे वहां से जारी शिनाख्ती कार्ड, मीडिया के लिए डीपीआरओ व मीडिया हाऊस से जारी किया गया कार्ड ही पास समझा जाएगा।

इसके साथ ही जाे काराेबार असैंशियल कैटेगरी में आते हैं, उन्हें खाेलने पर काेई मनाही नहीं है।

मगर बावजूद इसके लाेग अभी भी पास बनवाने के लिए जुगाड़ फिट करने में समय बर्बाद कर रहे हैं।

प्रशासन काे पास नही जारी कर रहा, लाेग गाईडलाईनस का पालन करें – एडीसी

एडीसी जसबीर सिंह से जब इस बारे में बात की गई ताे उन्हाेंने बताया कि प्रशासन द्वारा काेई लाकडाऊन से छुट संबंधी पास जारी नहीं किए जा रहे। एडीसी ने कहा कि लाेग सरकार द्वारा जारी गाईडलाईनस का यथावथ पालन करें, ताकि उन्हें किसी किस्म की परेशानी न झेलनी पड़े।

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