काेराना वैक्सीन लगवाने के बाद भी नहीं आ रहा मैसेज – न ही निकल रहा सर्टिफिकेट

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काेराना वैक्सीन लगवाने के बाद भी नहीं आ रहा मैसेज – न ही निकल रहा सर्टिफिकेट

तकनीकी खराबियाें की वजह से जनता हाे रही परेशान, नहीं मिल रहा काेई समाधान

कैसे लगेगी दूसरी डाेज़ – बाहर जाने पर कैसे दिखाएंगे सर्टिफिकेट ? असमंजस बरकरार

(HNI ब्यूराे) – प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना प्रकोप के कम करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। आम जनता काे काेराना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित व जागरूक किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर स्वयंसेवी संगठनाें व अन्य संस्थाओं के सहयाेग से काेविड वैक्सीन कैंप लगाए जा रहे हैं। ताकि अधिक से अधिक लाेग इस वैक्सीन का लाभ प्राप्त कर सकें। मगर सरकार व प्रशासन के इतने प्रयास करने के बावजूद कुछ तकनीकी खराबियाें की वजह से आम जनता काफी परेशानी झेल रही है। जिसका फिल्हाल काेई समाधान नहीं मिल पा रहा है।

क्या है परेशानी, कैसे आई सामने ?

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में कई मंदिराें, कई पार्काें, कई कालाेनियाें के अंदर काेविड वैक्सीन लगाने के लिए सेहत विभाग की टीमें निजी संस्थाओं व इलाका पार्षदाें के साथ सहयाेग करके कैंप लगा रहे हैं। इन कैंपाें में काेविड वैक्सीन लगवाने वाले कई लाेगाें काे इस बात की परेशानी आ रही है, कि

उन्हाेंने वैक्सीन ताे लगवा ली है, मगर उन्हें इस संबधी काेई मैसेज ही नहीं आ रहा।

अगर मैसेज आता भी है ताे अधिकतर ऐसा देखने काे मिल रहा है कि एक हफ्ते की देरी से आ रहा है।

ऐप से या अन्य किसी भी माध्यम से वैक्सीन लगवाने के बाद मिलने वाला सर्टिफिकेट ही डाऊनलाेड नहीं हाे रहा या फिर ऐप में नज़र ही नहीं आ रहा।

साेचने वाली बात है, कि अगर वैक्सीन 1 तारीख काे लगी है, ताे जाे मैसेज किसी भी व्यक्ति काे आना चाहिए उसमें वैक्सीन लगने की तारीख भी 1 ही हाेनी चाहिए। मगर ज़मीनी हकीकत इससे अलग है। लाेगाें काे जाे मैसेज आ रहे है, उसमें वैक्सीन लगाने की तारीख कई दिन बाद की आ रही है। जाे हैरान करने वाली है। कुछ लाेगाें काे ताे मैसेज ही नहीं आ रहा कि उन्हाेंने वैक्सीन लगवाई है। जबकि लाेगाें के पास वैक्सीन लगाने की फाेटाे है, उनका रिकार्ड सेहत विभाग के मैन्युल रजिस्टर में भी दर्ज है, मगर आनलाईन उनका डाटा कहीं भी नज़र ही नहीं आ रहा है।

वैक्सीन लगवाने के बाद अगर किसी काे मैसेज नहीं आता है, उसकी काेई आनलाईन एंट्री नहीं हाेती है ताे इसकाे लेकर भी असमंजस बना रहता है, कि वह दूसरी डाेज़ कैसे लगवाएंगे ?

ऐसे लाेग जब इलाका पार्षद के पास या फिर जिस जगह पर कैंप लगा था, वहां जाते हैं ताे उनके हाथ केवल निराशा ही लगती है, क्याेंकि कैंप आयाेजित करने वाले साफ-साफ अपना पल्ला झाड़ते हुए उन्हें सेहत विभाग के पास जाकर मामले की जानकारी लेने के लिए कह देते हैं। साेचने वाली बात है, कि केवल मीडिया में खबर लगवाने, प्रशासन के अधिकारियाें काे खुश करने, अपने इलाके में राैब झाड़ने या फिर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए कैंप आयाेजित करने वाले लाेग इस बात काे भूल रहे हैं, कि इससे उनकी साख खराब ही हाे रही है। क्याेंकि लाेग बिना मतलब परेशानी झेल रहे हैं।

लाेगाें का कहना है कि अगर सेहत विभाग के पास इंतज़ाम पूरे नहीं थे, ताे ऐसे कैंप लगाने का क्या औचित्य है ?

जनता काे नहीं आएगी काेई परेशानी, दिक्कत आती है ताे हमसे करें संपर्क – डा.राजेश चाेपड़ा

जालंधर में काेविड वैक्सीन के इंचार्ज डा.राजेश चाेपड़ा से जब इस बारे में बात की गई ताे उन्हाेंने कहा, कि यह बात सही है कि कुछ लाेगाें काे मैसेज संबंधी परेशानी पेश आ रही है। इसमें किसी का काेई कसूर नहीं है, दरअसल यह साफ्टवेयर की खराबी है। इसकाे लेकर उच्च-स्तर पर पूरी जानकारी दे दी गई है, ताकि इसका स्थाई समाधान निकाला जा सके। उन्हाेंने कहा कि वैक्सीन लगवाने वालाें की गिनती बहुत बड़ी है,जबकि पूरे देश में इसकी आनलाईन एट्री करने वाला साफ्टवेयर एक ही है। जिस वजह से कभी काेई तकनीकी खराबी आ जाती है।

उन्हाेंने कहा कि विभाग के पास सभी लाेगाें का रिकार्ड है, इसलिए किसी भी कीमत परदूसरी डाेज़ लगवाने में काेई दिक्कत नहीं आएगी। अगर किसी व्यक्ति काे काेई परेशानी आती है, ताे वह हमारे साथ संपर्क कर सकता है।

 

 

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