कैसे रूकेगी काेराना की रफ्तार ? आज भी कुछ लाेग हिदायताें का पालन करना समझते हैं अपनी शान के खिलाफ

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कैसे रूकेगी काेराना की रफ्तार ? आज भी कुछ लाेग हिदायताें का पालन करना समझते हैं अपनी शान के खिलाफ

(HNI ब्यूराे) – भारत में काेराना प्रकाेप बड़ी तेज़ी से फैलता जा रहा है। कई राज्याें में नाईट कर्फयू, कई में पूर्ण लाकडाऊन ताे कहीं सख्ती बरती जा रही है। सरकार व प्रशासन दाेनाें की तरफ से आम जनता काे जागरूक किया जा रहा है, कि काेविड गाईडलाईनस का पालन करें।

मास्क ज़रूर पहनें, दाे गज की दूरी बनाकर रखें, बार-बार साबुन से हाथ धाेयें, सैनीटाईज़र का इस्तेमाल करें, भीड़-भाड़ वाले इलाकाें में जाने से गुरेज करें, बिना ज़रूरी काम के घर से बाहर न निकलें। मगर न जाने क्या कारण है, कि आज भी कुछ लाेग इन हिदायताें का पालन करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

हाट न्यूज़ इंडिया की टीम ने ज़मीनी हकीकत जानने के लिए कुछ सरकारी दफ्तराें का दाैरा किया, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके, कि वहां आने वाले लाेग काेविड गाईडलाईनस का पालन कर रहे हैं या नहीं ?

टाईप-1 सेवा केन्द्र व सब-रजिस्ट्रार दफ्तर के क्या पाए गए हालात ?

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जालंधर के डीएसी में स्थित टाईप-1 सेवा केन्द्र व सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में जब हमारी टीम पहुंची ताे देखा, कि काफी लाेगाें ने मास्क ताे पहना हुआ था। मगर आपस में दूरी बनाने की जगह खुद ही भीड़ के रूप में एक जगह इकट्ठे हाेकर खड़े थे। जिससे काेराना संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता है।

सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में बने वेटिंग हाल के हालात सबसे अधिक विस्फाेटक नज़र आए। यहां इतनी ज्यादा भीड़ थी, कि बिना आपस में टकराए यहां से गुज़रना संभव नहीं प्रतीत हाे रहा था। दफ्तर के बाहर व अंदर रखी सैनेटाईज़र मशीनाें के अंदर सैनीटाईज़र खाली पड़ा हुआ था। बैठने के लिए रखी कुर्सियाें में भी लाेग बिना किसी दूरी के आपस में जुड़कर भी बैठे दिखाई दे रहे थे। दफ्तर के अंदर जहां अधिकारी रजिस्ट्रेशन का काम करते हैं, वहां भी भीड़ बाहर की भांती ही देखने काे मिली। यहां भी किसी काे गाईडलाईनस का पालन करने संबंधी हिदायतें नहीं दी जा रही थी। जिससे यहां काेराना के फैलने का चांस काफी बड़ सकता है।

सरकारी दफ्तर जहां पब्लिक डीलिंग ज्यादा हाेती है, वहां पर कुछ अधिकारी ताे काेराना काे लेकर काफी गंभीर दिखाई देते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें केवल अपने काम से मतलब है। उन्हें इस बात की रत्ती भर परवाह नहीं है, कि सरकार की हिदायतें, जैसे कि लाेगाें के बीच दूरी बनाना सुनिश्चित करना भी उनकी ड्यूटी में शामिल है। ऐसे अधिकारी भी काेराना संक्रमण फैलाने के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार हैं।

इतना ही नहीं काफी बड़ी गिनती में लाेग ऐसे भी थे, जिन्हाेंने मास्क नहीं पहना था, और जब उनसे मास्क न पहनने का कारण पूछा गया, ताे हर किसी ने काेई न काेई बहाना बनाकर बात काे टालने की काेशिश की। एक व्यक्ति ताे ऐसे भी थे, जिन्हाेंने इसे ढकाेसला बताते हुए बेहद भद्दी शब्दावली का इस्तेमाल तक कर डाला।

काेराना की राेकथाम काे लेकर सरकार के साथ-साथ आम जनता की भी बनती है पूरी ज़िम्मेदारी

यह कहना गल्त नहीं हाेगा, कि अगर काेराना के घातक परिणाम सामने आते हैं, ताे उसमें सरकार व प्रशासन की कमी न हाेकर आम जनता का एहम याेगदान हाेगा, क्याेंकि कुछ लाेग दूसराें की जान की परवाह ताे नही करते, मगर साथ ही उन्हें अपनी जान की भी काेई परवाह प्रतीत नहीं हाेती।

हम सबकाे अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हुए सभी गाईडलाईनस का पालन करना चाहिए। साथ ही अपने आस-पास लाेगाें काे भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। तभी हम सब मिलकर इस नामुराद बीमारी काे हराने में कामयाब हाे सकते हैं।

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