आपदा काे अवसर में बदलने का नारा जनता नहीं बल्कि सरकार के ऊपर बैठ रहा सटीक – ऋषि वर्मा

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आपदा काे अवसर में बदलने का नारा जनता नहीं बल्कि सरकार के ऊपर बैठ रहा सटीक – ऋषि वर्मा

लेबर कास्ट इतनी अधिक बढ़ चुकी है, कि आम आदमी का घर बनाने का सपना केवल सपना ही बनकर रह गया

आर्किटैक्टस पर साईलैंट अटैक करते हुए इतना बाेझ बढ़ा दिया है, कि हमारा काम करना हुआ मुश्किल

(HNI ब्यूराे) – काेराना काल के अंदर शायद ही ऐसा काेई व्यक्ति हाेगा जाे इससे प्रभावित न हुआ हाे। जहां इसका असर आम काराेबारियाें पर पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ प्राेफैशलन लाेग जैसे कि आर्किटैक्ट आदि के ऊपर भी इसका काफी असर देखने काे मिल रहा है। हाट न्यूज़ इंडिया से एक विशेष साक्षात्कार में प्राेफैशनल बिल्डिंग डिज़ाईनर एसाेसिएशन के वाईस प्रधान सिविल इंजीनियर ऋषि वर्मा ने इस संबधी अपने विचार रखे एवं बेहद विस्तार से माैजूदा हालाताें के बारे में जानकारी प्रदान की।

आपदा काे अवसर में बदलने का नारा माैजूदा समय के अंदर काराेबारियाें के लिए उपयुक्त न दिखाई देते हुए सरकार के ऊपर सटीक बैठता है।

ऋषि वर्मा ने कहा कि सिविल इंजीनियर प्राेफैशनल ज़मीन के साथ जुड़े हाेते हैं, 2 सल पहले जाे मिस्त्री 500 रूपए दिहाड़ी में मिल जाता था, आज 800 रूपए में भी मिलना मुश्किल हाे रहा है। सरकार की तरफ से इस फील्ड में किसी प्रकार की काेई सहायता प्रदान नहीं की जा रही है।

कंस्ट्रक्शन (निर्माण) कार्य से संबंधित सभी लाेग काेराना काल के इस समय बुरी तरह से प्रभावित हाे रहे हैं। लेबर कास्ट इतनी अधिक बढ़ चुकी है, कि आम आदमी का अपने घर काे बनाने का सपना केवल सपना ही बनकर रह गया है। ज़मीनी हकीकत यह है कि काराेबारियाें का बुरा हाल हाे चुका है, शब्दाे में इसका बयान तक करना संभव नहीं है।

उन्हाेंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े बयान जारी करती है, कि घर के लिए बैंकाें से सस्ते लाेन मिलेंगे, मगर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कल उल्ट है।

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ऋषि वर्मा ने बताया कि नक्शे पास करने की आनलाईन मुहिम बहुत बढ़िया कदम है, मगर इसकी फीस या फिर एनओसी लेने की फीस इतनी बढ़ा दी गई है, जिससे आम जनता के लिए फीस जमा करवाना लाेहे के चने चबाने के समान हाेने लगा है। हर साल 15 प्रतिशत की वृद्वि कर दी जाती है।

आम लाेगाें के मन में आता है, कि उनके लिए नक्शा पास करवाना संभव नहीं है। इसलिए लाेग रास्ता जाे कि भ्रष्टाचार की तरफ जाता है, उसे अपनाने लगते हैं। 15- 0 मरले के मकान का नक्शा पास करने के लिए पहले एनओसी लेनी पड़ती है। 370 प्रति गज का रेट है।

अगर इस हिसाब से देखा जाए ताे केवल एनओसी के लिए 40-45 हजार लगता है, उसके बाद 30-32 हजार नक्शा पास करवाने के लिए लगता है। इसका मतलब है कि केवल नक्शा पास करवाने के लिए 70-80 हजार रूपए लग जाता है। मकान बनाने का खर्चा बाद में आता है।

इतना ही नहीं सरकार की तरफ से आर्किटैक्टस पर साईलैंट अटैक करते हुए इतना बाेझ बढ़ा दिया है, कि हमारा काम करना मुश्किल हाे चुका है। सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से बिना नाेटिस के ही न्यू रजिस्ट्रशन फीस बढ़ा दी गई है।जाे पहले 200 रूपए हुआ करती थी, उसे सीधा 11 हजार रूपए कर दिया। सालाना रिन्युवल फीस काे 100 से बढ़ाकर सीधा 3000 हजार रुपए कर दिया गया।

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