गुंडागर्दी AMCAN IMMIGRATION के मालिक की, सरकार के आदेश काे धत्ता बताते हुए खाेला दफ्तर !

गुंडागर्दी AMCAN IMMIGRATION के मालिक की, सरकार के आदेश काे धत्ता बताते हुए खाेला दफ्तर !

मीडिया से की बदसलूकी, कहा मेरी डीसी से सैटिंग, हिम्मत है ताे पर्चा करके दिखाओ

पुलिस के पास शिकायत हुई दर्ज, सिफारिश लगाकर बिना कारवाई थाने से लाैटा वापिस

(HNI ब्यूराे) –  प्रदेश सरकार एवं प्रशासन द्वारा लगातार बढ़ रहे काेराना के मद्देनज़र कुछ दिन पहले सभी प्राईवेट दफ्तर बंद करके वर्क फराम हाेम का आदेश जारी किया गया है। गत दिवस जब हाट न्यूज़ इंडिया की टीम अराेड़ा प्राईम टावर स्थित AMCAN IMMIGRATION के दफ्तर पहुंचे, ताे वह खुला था एवं वहां रूटीन कामकाज चल रहा था। जब मीडियाकर्मियाें ने रिसैप्शन पर बिना मास्क पहने रिसैप्शनिस्ट से सरकार के आदेशाें की अव्हेलना करने संबंधी पूछा, ताे उसने कहा, कि हमें ऐसे किसी आदेश की काेई जानकारी नहीं है।

महिला मीडियाकर्मी काे बाेले आपत्तीजनक शब्द, माेबाईल छीनने का किया प्रयास

जब दफ्तर के मालिक का बयान लेने के लिए उनसे बात करने की काेशिश की गई. ताे उन्हाेंने बाहर आते ही मीडियाकर्मी जिसमें एक महिला जर्नलिस्ट भी शामिल थी, उसके साथ बेहद आपत्तीजनक भाषा में अनाप-शनाप बाेलना आरंभ कर दिया। इतना ही नहीं दफ्तर में माैजूद स्टाफ सदस्य भी मीडियाकर्मियाें के साथ विवाद करने लगे। इमीग्रेशन कंपनी के मालिक व स्टाफ का कहना था, कि और भी दफ्तर खुले हैं, पहले उन्हें बंद कराओ, तब हम अपना दफ्तर बंद करेंगे। इसके साथ ही कंपनी के मालिक ने मीडियाकर्मी का माेबाईल फाेन भी छीनने की काेशिश करते हुए उन्हें वीडियाे न बनाने का दबाव बनाया।

सबक सिखाने की दी धमकी

कंपनी के मालिक का रवैय्या इतना खराब था, कि वह बार-बार अपने ऊंचे रसूख व सैटिंग का हवाला देकर यह कह रहा था, कि मैं तुम्हें सबक सिखाऊंगा, तुम मेरे दफ्तर के पास आए कैसे।

मैं भारतीय नागरिक नहीं, मुझे किसी कानून का काेई डर नहीं 

प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनी मालिक के पास कैनेडा की सिटिज़नशिप है, और वह यहां साल में कुछ महीने केवल ट्रैवल एजैंटी का काम करने के लिए आता है। जब मीडिया कर्मी इसके खिलाफ बद्तमीजी करने व कानून ताेड़ने की बात कर रहे थे, ताे उसका कहना था, कि भारत का काेई कानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, क्याेंकि वह यहां का नागरिक है ही नहीं। इतना ही नहीं वह यहां के किसी कानून काे मानने से भी इंकार करता है।

थाने में जाकर भी दिखाई दबंगई, कहा हिम्मत है ताे पर्चा करके दिखाओ

मामला बढ़ता देख कंपनी मालिक की शिकायत थाना बारादरी में की गई। जहां पुलिस कर्मचारी उसे उसके दफ्तर से थाने में बुलाकर लाए। मगर थाने में आकर भी उसने अपनी दबंगई दिखानी नहीं छाेड़ी। बार-बार वह यही कह रहा था, कि उसके कनैक्शन बहुत ऊपर तक हैं, तुम मेरे खिलाफ पर्चा करके ताे दिखाओ। मेरी पुलिस से बात हाे चुकी है।

वापिस जाते समय भी देख लेने की दी धमकी

काफी देर चली बातचीत में उसने अपनी गल्ती स्वीकारना ठीक नहीं समझा। मगर पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात है, कि न जाने किसकी सिफारिश से वह थाने से बड़ी शान से वापिस लाैट गया। जाते समय भी वह मीडियाकर्मियाें काे धमकी देकर गया, कि इसका अंजाम अच्छा नहीं हाेगा, मैं तुम्हें देख लूंगा।

साेचने वाली बात है, कि सरकार के आदेश का एक ट्रैवल एजैंट सरेआम उल्लंघन करता है, मीडिया कर्मियाें के साथ बदतमीजी भी करता है, पुलिस में उसके खिलाफ लिखित शिकायत भी दी जाती है, मगर उसके खिलाफ कारवाई नहीं की जाती। बल्कि उसे बड़े आराम से वहां से जाने दिया जाता है, जैसे कि वह काेई अपराधी/आराेपी न हाेकर काेई वीआईपी हाे, जिसका पूरे थाने में एकछत्र राज चलता हाे।

देखने वाली बात है, कि उस ट्रैवल एजैंट के खिलाफ काेई कारवाई हाेती है, या फिर शिकायत काे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

मीडिया पर हाे रहे हमले चिंताजनक, ऐसे ट्रैवल एजैंट का लाईसैंस हाे रद्द – सुरिंदर पाल

प्रिंट एंड इलैक्ट्राेनिक मीडिया एसाेसिएशन (PEMA) के प्रधान सुरिंदर पाल ने कहा कि इस प्रकार से मीडिया पर निरंतर हाे रहे हमले चिंतानजक हैं। पुलिस काे ऐसे लाेगाें के खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाई करनी चाहिए। इतना ही नहीं डीसी काे कानून का उल्लंघन करने वाले ऐसे ट्रैवल एजैंटाें का लाईसैंस भी रद्द करना चाहिए।

2 Comments

  • Shawana Stocks
    May 1, 2021

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    • Harinder
      May 1, 2021

      People are dying in India and if the media is so vigilant that they can check each business activity then why don’t help the big concern. I feel media is also try to black mail these soft targets like open business to make money.
      Was this the only business that was open?
      There are thousands of corruption cases where you can see taking bribes openly
      As a small business owner I can feel the pain of survival in this period of crisis where no one is listening there problems

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